Saturday, 6 July 2013

अरहर / Cajanus cajan / pigeon pea


अरहर/ Cajanus cajan / pigeon pea

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सामान्य परिचय : अरहर दो प्रकार की होती है पहली लाल और दूसरी सफेद। वासद अरहर की दाल बहुत मशहूर है। सुस्ती अरहर की दाल व कनपुरिया दाल एवं देशी दाल भी उत्तम मानी जाती है। दाल के रूप में उपयोग में लिए जाने वाली सभी दलहनों में अरहर का प्रमुख स्थान है। यह गर्म और रूक्ष होती है जिन्हें इसकी प्रकृति के कारण हानि हो वे लोग इसकी दाल को घी में छोंककर खायें, फिर किसी प्रकार की हानि नहीं होगी। अरहर के दानों को उबालकर पर्याप्त पानी में छौंककर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है। अरहर की हरी-हरी फलियों में से दाने निकालकर उसका सब्जी भी बनायी जाती है। बैंगन की सब्जी में अरहर की हरी फलियों के दाने मिलाने से अत्यंत स्वादिष्ट सब्जी बनती है। अरहर की दाल में इमली अथवा आम की खटाई तथा गर्म मसाले डालने से यह अधिक रुचिकारक बनती है। अरहर की दाल में पर्याप्त मात्रा में घी मिलाकर खाने से वह वायुकारक नहीं रहती। इसकी दाल त्रिदोषनाशक (वात, कफ और पित्त) होने से सभी के लिए अनुकूल रहती है। अरहर के पौधे की सुकोमल डंडियां, पत्ते आदि दूध देने वाले पशुओं को विशेष रूप से खिलाए जाते हैं। इससे वे अधिक तरोताजा बनते हैं और अधिक दूध देते हैं।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत आढकी, तुवरी, शणपुष्पिका
हिंदी अरहर
बंगाली अड़हर
मराठी तुरी
तेलगू कादुल
अंग्रेजी पीजन पी
लैटिन कैजेनस इंडिकस

रंग : इसका रंग पीला और लाल होता है।

स्वाद : इसकी दाल खाने में फीकी तथा स्वादिष्ट होती है।

स्वाभाव : अरहर की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है।

गुण :यह कषैली, रूक्ष, मधुर, शीतल, पचने में हल्की, ट्टटी को न रोकने वाली, वायुउत्पादक, शरीर के अंगों को सुंदर बनाने वाली एवं कफ और रक्त सम्बंधी विकारों को दूर करने वाली है। लाल अरहर की दाल, हल्की, तीखी तथा गर्म होती है। यह अग्नि को प्रदीप्त करने वाली (भूख को बढ़ाने वाली) और कफ, विष, खून की खराबी, खुजली, कोढ़ (सफेद दाग) तथा जठर (भोजन पचाने का भाग) के अंदर मौजूद हानिकारक कीड़ों को दूर करने वाली है। अरहर की दाल पाचक है तथा बवासीर, बुखार और गुल्म रोगों में भी यह दाल लाभकारी है।

विभिन्न रोगों में अरहर से उपचार: :


1 खुजली : -अरहर के पत्तों को जलाकर उसकी राख को दही में मिलाकर लगाने से खुजली मिटती है।

2 आधासीसी (आधे सिर का दर्द या माइग्रेन) : -अरहर के पत्तों तथा दूब (दूर्वा घास) का रस इकठ्ठा करके नाक में लेने से आधासीसी में लाभ होता है।

3 भांग का नशा :-अरहर की दाल को पीसकर, पानी मिलाकर पीने से भांग का नशा उतर जाता है अथवा अरहर की दाल को पानी में उबालकर या पानी में भिगोकर उसका पानी पिलाना चाहिए।

4 सांप के विष पर : -अरहर की जड़ को चबाकर खाने से सांप के विष में लाभ होता है।

5 पसीना :-एक मुट्ठी अरहर की दाल, एक चम्मच नमक और आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ को मिलाकर सरसों के तेल में डालकर छोंककर पीस लें। इस पाउडर से शरीर पर मालिश करने से पसीना आना बंद हो जाता है। सन्निपात की हालत में पसीना आने पर भी यह प्रयोग कर सकते हैं।

6 मुंह में छाले : -अरहर की दाल छिलको सहित पानी में भिगोकर उस पानी से कुल्ले करने पर छाले ठीक हो जाते हैं। यह गर्मी के प्रभाव दूर करती है।

7 अभिन्यास ज्वर : -अधिक पसीना आने की स्थिति में भुने हुए अरहर के बीजों का बारीक चूर्ण या शंख भस्म (राख) को शरीर पर लगायें। यदि रोगी पर इस औषधि का कोई असर न दिख रहा हो तो उसे फौरन डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

8 अंडकोष के एक सिरे का बढ़ना : -अरहर की दाल को पानी में भिगो दें। उसी पानी में उसे बारीक पीसकर थोड़ा गर्म करें। इसके बाद उसे अंडकोष पर लगायें। सुबह-शाम कुछ दिनों तक ऐसा ही करने से अंडकोष में लाभ होता है।

9 दांतों की बीमारी : -अरहर के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से दांतों की पीड़ा खत्म होती है।

10 बालों के रोग (अपोपिका) : -सिर के धब्बे को खुरदरे कपड़ों से रगड़कर साफ करने के बाद अरहर की दाल पीसकर रोजाना 3 बार इसका प्रयोग करें। इसके दूसरे दिन सरसों का तेल लगाकर धूप में बैठ जाएं और 4 घण्टे बाद फिर से इसे लगायें, इसी तरह कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करने से बाल फिर से उग आते हैं।

11 जीभ की सूजन और जलन : -जीभ में छाले पड़ना तथा जीभ के फटने पर अरहर के कोमल पत्तों को चबाएं।

12 बालों की रूसी : -अरहर की दाल छिलके सहित 1 गिलास पानी में रख दें और इसे पीसकर माथे पर लेप करें। इसके बाद सिर को धोकर कंघी करें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से रूसी दूर हो जाएगी।

13 पेट की गैस बनना : -अरहर की दाल खाने से पेट की गैस की शिकायत दूर होती है।

14 हिचकी : -अरहर के छिलके का धूम्रपान करने से हिचकी नहीं आती है।

15 कान की सूजन और जलन : -कान की सूजन होने पर अरहर की दाल को पीसकर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

16 घाव : -अरहर के कोमल पत्ते पीसकर लगाने से घाव भर जाते हैं।

17 पित्त की पथरी : -अरहर के पत्ते 6 ग्राम और संगेयहूद लगभग आधा ग्राम को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पथरी में बहुत ही फायदा होता है।

18 स्त्री के स्तनों में दूध की अधिकता से उत्पन्न विकार : -*अरहर (रहरी, शहर) के पत्तों और दालों को एक साथ पीसकर हल्का-सा गर्म करके स्तनों पर लगाने से दूध रुक जाता है।
*दाल को पीसकर लेप की भांति स्तनों पर लगाने से स्तनों में आई सूजन नष्ट हो जाती है।"

19 मुर्च्छा (बेहोशी) होने पर : -आधा घंटे तक अरहर की दाल को एक कप पानी में भीगने दें। इसके बाद इस पानी को रोगी की नाक में एक-एक बूंद करके डालें। कुछ देर बाद ही जब व्यक्ति होश में आ जाये तो बचे हुए पानी को रोगी को पिला दें।

20 सिर का दर्द : -अरहर के कच्चे पत्तों और हरी दूब का रस निकालकर उसे छानकर सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।

21 शरीर में सूजन : -शरीर के सूजन वाले अंग पर 4 चम्मच अरहर की दाल को पीसकर बांधने से उस अंग की सूजन खत्म हो जाती है।

22 नाड़ी की जलन :-नाड़ी की जलन में अरहर (रहरी) की दाल को जल के साथ पीसकर लेप बना लें। इसके लेप को नाड़ी की जलन पर लगाने से रोग जल्द ठीक हो जाते हैं।

23 गले की सूजन और छाले : -गले के छाले दूर करने के लिए अरहर के पत्तों तथा धनिये के पत्तों को उबालकर उस पानी से कुल्ला करें।

24 गले के रोग : -रात को अरहर की दाल को पानी में भिगोने के लिए रख दें। सुबह इस पानी को गर्म करके कम से कम दो से तीन बार कुछ देर तक कुल्ला करने से कंठ (गले) की सूजन दूर हो जाती है।

Thursday, 4 July 2013

कटहल के स्वास्थ्य लाभ//Health Benefits of Jackfruit


                          कटहल का फल है बड़ा उपयोगी 


भारत में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल कटहल विश्व में सबसे बड़ा होता है। कटहल की सब्जी, पकौडे़ या अचार आदि बनाए जाते है। जब यह पक जाता है तब इसके अंदर के मीठे फल को खाया जाता है जो कि बडा़ ही स्वादिष्ट लगता है। कटहल के अंदर कई पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जैसे, विटामिन ए, सी, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक आदि। इस फल में खूब सारा फाइबर पाया जाता है साथ ही इसमें बिल्कुल भी कैलोरी नहीं होती है।

पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाला जाए और इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फ़ूर्ती आती है, यह हार्ट के रोगियों के लिये भी अच्छा माना जाता है।
कटहल के स्वास्थ्य लाभ---

- कटहल में पोटैशियम पाया जाता है जो कि हार्ट की समस्या को दूर करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को लो कर देता है।
- इस रेशेदार फल में काफी आयरन पाया जाता है जो कि एनीमिया को दूर करता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढाता है।
- इसकी जड़ अस्थमा के रोगियो के लिये अच्छी मानी जाती है। इसकी जड़ को पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर पिये तो अस्थमा कंट्रोल हो जाएगा।
- इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिये प्रभावशाली होता है। खासतौर पर यह हार्मोन के उत्पादन और अवशोषण के लिये अच्छा माना जाता है।
- हड्डियों के लिये भी यह फल बहुत अच्छा होता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम हड्डी में मजबूती लाता है तथा भविष्य में ऑस्टियोपुरोसिस की समस्या से निजात दिलाता है।
- इसमें विटामिन सी और ए पाया जाता है जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और बैक्टीरियल और वाइरल इंफेक्शन से बचाता है।
- इसमें मौजूद शर्करा जैसे, फ्रक्टोज़ और सूकरोज़ तुरंत ऊर्जा देते हैं। इस शर्करा में बिल्कुल भी जमी हुई चर्बी और कोलेस्ट्रॉल नहीं होता।
- यह फल अल्सर और पाचन सम्बंधी समस्या को दूर करते हैं। इसमें फाइबर होता है जो कि कब्ज की समस्या को दूर करते हैं।
- इसका स्वास्थ्य लाभ आंखों तथा त्वचा पर भी देखने को मिलता है। इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रौशनी बढती है और स्किन अच्छी होती है। यह रतौंधी को भी ठीक करता है।
सावधानी ---
पका कटहल का फल कफवर्धक है, अत: सर्दी-जुकाम, खांसी, अर्जीण आदि रोगों से प्रभावित व्यक्तियों एवं गर्भवती महिलाओं को कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
कटहल खाने के बाद पान खान से पेट फूल जाता है और अफरा होने का डर रहता है अत: भूल कर भी कटहल के बाद पान न खाएं।दुबले-पतले पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को पका कटहल दोपहर में खाकर कुछ देर आराम करना चाहिए।

लक्ष्मण को आप कितना जानते हैं?

रामायण अनुसार राजा दशरथ के तीसरे पुत्र थे लक्ष्मण। उनकी माता का नाम सुमित्रा था। भगवान राम से लक्ष्मण बहुत प्रेम रखते थे। लक्ष्मण के लिए राम ही माता-पिता, गुरु, भाई सब कुछ थे और उनकी आज्ञा का पालन ही इनका मुख्य धर्म था। वे उनके साथ सदा छाया की तरह रहते थे। भगवान श्रीराम के प्रति किसी के भी अपमानसूचक शब्द को ये कभी बरदाश्त नहीं करते थे। वास्तव में लक्ष्मण का वनवास राम के वनवास से भी अधिक महान है। 14 वर्ष पत्नी से दूर रहकर उन्होंने केवल राम की सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बनाया।

शेषावतार : भगवान राम को जहां विष्णु का अवतार माना गया है वहीं लक्ष्मण को शेषावतार कहा जाता है। हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार शेषनाग के कई अवतारों का उल्लेख मिलता है जिनमें राम के भाई लक्ष्मण और कृष्ण के भाई बलराम मुख्य हैं। शेषनाग भगवान विष्णु की शैया है।

लक्ष्मण का जन्म : दशरथ की तीन पत्नियां थी। महर्षि ऋष्यश्रृंग ने उन तीनों रानियों को यज्ञ सिद्ध चरू दिए थे जिन्हें खाने से इन चारों कुमारों का आविर्भाव हुआ। कौशल्या और कैकेयी द्वारा प्रसाद फल आधा-आधा सुमित्रा को देने से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। कौशल्या से राम और कैकेयी से भरत का जन्म हुआ।

गुरु : राम और लक्ष्मण सहित चारों भाइयों के दो गुरु थे- वशिष्ठ, विश्वामित्र। विश्वामित्र दण्डकारण्य में यज्ञ कर रहे थे। रावण के द्वारा वहां नियुक्त ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे- राक्षस इनके यज्ञ में बार-बार विघ्न उपस्थित कर देते थे। विश्वामित्र अपनी यज्ञ रक्षा के लिए श्रीराम-लक्ष्मण को महाराज दशरथ से मांगकर ले आए। दोनों भाइयों ने मिलकर राक्षसों का वध किया और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा हुई। विश्वामित्र ने ही राम को अपनी विद्याएं प्रदान कीं और उनका मिथिला में सीता से विवाह संपन्न कराया।


माना जाता है कि लक्ष्मण की तीन पत्नियां थीं- उर्मिला, जितपद्मा और वनमाला। लेकिन रामायण में उर्मिला को ही मान्यता प्राप्त पत्नी माना गया, बाकी दो पत्नियां की उनके जीवन में कोई खास जगह नहीं थी।

उर्मिला : लक्ष्मण की पत्नी का नाम उर्मिला था। लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई के लिए चौदह वर्षों तक पत्नी से अलग रहकर वैराग्य का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उर्मिला जनकनंदिनी सीता की छोटी बहन थीं और सीता के विवाह के समय ही दशरथ और सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण को ब्याही गई थीं। लक्ष्मण से इनके अंगद और चन्द्रकेतु नाम के दो पुत्र तथा सोमदा नाम की एक पुत्री उत्पन्न हुई। अंगद ने अंगदीया पुरी तथा चन्द्रकेतु ने चन्द्रकांता पुरी की स्थापना की थी।

जितपद्मा : लक्ष्मण की एक और पत्नी थी जिसका नाम था- जितपद्मा। लक्ष्मण ने मध्यप्रदेश में क्षेत्रांजलिपुर के राजा के विषय में सुना कि जो उसकी शक्ति को सह लेगा, उसी से वह अपनी कन्या का विवाह कर देगा। लक्ष्मण ने भाई की आज्ञा से राजा से प्रहार करने को कहा। प्रहार शक्ति सहकर उन्होंने शत्रुदमन राजा की कन्या जितपद्मा को प्राप्त किया। जितपद्मा को समझा-बुझाकर राम, सीता तथा लक्ष्मण नगर से चले गए। 

वनमाला : महीधर नामक राजा की कन्या का नाम वनमाला था। उसने बाल्यकाल से ही लक्ष्मण से विवाह करने का संकल्प ले रखा था। लक्ष्मण के राज्य से चले जाने के बाद महीधर ने उसका विवाह अन्यत्र करना चाहा, किंतु वह तैयार नहीं हुई। वह सखियों के साथ वनदेवता की पूजा करने के लिए गई। बरगद के वृक्ष के नीचे खड़े होकर उसने गले में फंदा डाल लिया। वह बोली कि लक्ष्मण को न पाकर मेरा जीवन व्यर्थ है, अत: वह आत्महत्या करने के लिए तत्पर हो गई। संयोग से उसी समय लक्ष्मण ने वहां पर पहुंचकर उसे बचाया तथा उसे ग्रहण किया।


लक्ष्मण रेखा : लक्ष्मण रेखा का किस्सा रामायण कथा का महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध प्रसंग है। यहीं से वनवासी राम और लक्ष्मण की जिंदगी बदल जाती है। रामायण अनुसार वनवास के समय सीता के आग्रह के कारण भगवान राम मायावी स्वर्ण मृग (हिरण) के आखेट हेतु उसके पीछे चले जाते हैं। थोड़ी देर में सहायता के लिए राम की पुकार सुनाई देती है, तो सीता माता व्याकुल हो जाती है। वे लक्ष्मण से उनके पास जाने को कहती है, लेकिन लक्ष्मण बहुत समझाते हैं कि यह किसी मायावी की आवाज है राम की नहीं, लेकिन सीता माता नहीं मानती हैं। तब विवश होकर जाते हुए लक्ष्मण ने कुटी के चारों ओर एक रेखा खींच दी और सीता माता से कहा कि आप किसी भी दशा में इस रेखा से बाहर न आना।

लेकिन तपस्वी के वेश में आए रावण के झांसे में आकर सीता ने लक्ष्मण की खींची हुई रेखा से बाहर पैर रखा ही था कि रावण उसका अपहरण कर ले गया। उस रेखा से भीतर रावण सीता का कुछ नहीं बिगाड़ सकता था, तभी से आज तक 'लक्ष्मण रेखा' नामक उक्ति इस आशय से प्रयुक्त होती है कि किसी भी मामले में निश्चित हद को पार नहीं करना है चाहिए वरना नुकसान उठाना पड़ता है।


लक्ष्मण मूर्च्छा : राम-रावण युद्ध के समय मेघनाद के तीर से लक्ष्मण मूर्च्छित होकर गिर पड़े। लक्ष्मण की गहन मूर्च्छा को देखकर सब चिंतित एवं निराश होने लगे। विभीषण ने सबको सांत्वना दी। सभी ने संजीवनी बूटी की खोज में हनुमानजी को भेजा और हनुमानजी संजीवनी का पहाड़ ही उठा लाए।

पुन: युद्ध करते समय रावण ने लक्ष्मण पर शक्ति का प्रहार किया। लक्ष्मण मूर्च्छित हो गए। लक्ष्मण की ऐसी दशा देखकर राम विलाप करने लगे। सुषेण ने कहा- 'लक्ष्मण के मुंह पर मृत्यु-चिह्न नहीं है अत: आप निश्चिंत रहिए।'


लखनऊ : मान्यता है कि लखनऊ शहर लक्ष्मण ने बसाया था। उत्तर भारत में लक्ष्मण को लखन भी कहते हैं। लखनऊ उस क्षेत्र में स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ प्राचीन कौशल राज्य का हिस्सा था। इसे पहले लक्ष्मणावती, लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना जाता था, जो बाद में बदलकर लखनऊ हो गया। यहां से अयोध्या मात्र 80 मील दूरी पर स्थित है।

लक्ष्मण झूला : उत्तरांचल के गढ़वाल क्षेत्र के ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि सबसे पहले इसे राम के भाई लक्ष्मण ने बनवाया था। लक्ष्मण ने यह झूला जूट से बनवाया था। बाद में 1939 में इसे आधुनिक रूप दिया गया। 450 फीट लंबे लक्ष्मण झूले के समीप ही लक्ष्मण और रघुनाथ का मंदिर है।

लक्ष्मण मंदिर : लक्ष्मण के देशभर में बहुत सारे मंदिर है। एक मंदिर हेमकुंड झील के तट पर है जिसे लोकपाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मंदिर ठीक उसी जगह है, जहां भगवान राम के भाई लक्ष्मण ने रावण ने बेटे मेघनाद को मरने के बाद अपनी शक्ति को वापस पाने के लिए तप किया था।

भारत के सबसे प्राचीन इटों से बने मंदिरों में से एक छत्तीसगढ़ में लक्ष्मण मंदिर महानदी के किनारे खड़ा है। दक्षिण कौसल की राजधानी श्रीपुर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातत्व स्थलों में एक है। यहां कभी दस हजार भिक्षु भी रहा करते थे।

इस तरह लक्ष्मण के कई प्राचीन मंदिर है।

66 सालों में छह हजार प्रतिशत गिरा रुपया

66 सालों में छह हजार प्रतिशत गिरा रुपया

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नई दिल्ली। बढ़ते भुगतान असंतुलन, चालू खाता घाटे में वृद्धि और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण पिछले 66 सालों में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में 6000 प्रतिशत की गिरावट आई है।

आंकड़ों के अनुसार देश की स्वतंत्रता के समय विदेश व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में था और रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले बराबर थी।

आंकडों में वर्ष 1947 में एक डॉलर की कीमत एक रुपए थी। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति मजबूत थी तथा वर्ष 1925 में डॉलर के दाम मात्र 10 पैसे थे। वर्ष 19।7 में डॉलर साढ़े सात पैसे का था।

हाल में डॉलर की कीमत 61 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंचती नजर आई। डॉलर के मुकाबले रुपए के भाव ऐतिहासिक गिरावट में है।

बढ़ते व्यापार असंतुलन और चालू खाता घाटे में वृद्धि होने कारण रुपए के भाव 60 रुपए प्रति डॉलर के ऊपर बने हुए है और इसके भाव निकट भविष्य मे 65 रुपए प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

पिछले कारोबारी दिवस में अंतरबैकिंग मुद्रा बाजार में डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत 60.21 रुपए प्रति डॉलर रही। (वार्ता)

Tuesday, 2 July 2013

आसान नुस्खे जो पेट के कीड़ों को पूरी तरह मार गिराते है // Easy Tips slay the stomach is full of bugs

आसान नुस्खे जो पेट के कीड़ों को पूरी तरह मार गिराते है  // Easy Tips slay the stomach is full of bugs
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सदियों पुराने पेट के कृमियों की समस्या और निवारण के ये आसान नुस्खे जो पेट के कीड़ों को पूरी तरह मार गिराते है ---------


संक्रमित भोजन और पेय पदार्थों के सेवन, घरों के आसपास की गंदगी, अधकचे भोजन का सेवन जैसी अनेक वजहें हैं जो पेट में कृमि की शिकायत बनते हैं। पेट में कृमि होने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर काफी प्रभाव पड़ता हैं। थकान, चिड़चिड़ापन और शारीरिक दुर्बलता के अलावा चेहरे और शरीर की त्वचा पर सफेद धब्बे आदि बनना इस रोग के लक्षणों के तौर पर माने जाते हैं। स्वस्थ रहन-सहन अनेक रोगों को हमसे दूर रखता है फिर भी यदि कृमियों से आप संक्रमित हो जाएं तो घबराने की बात नहीं। हिन्दुस्तानी आदिवासियों के हर्बल नुस्खे अपनाकर आप भी प्राकृतिक हर्बल उपायों के आधार पर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। चलिए आज जानते हैं आदिवासियों के 10 जबरदस्त हर्बल उपाय जिनका उपयोग कर आप भी पेट के कृमियों की समस्या से निपट सकते हैं।

पेट के कृमियों की समस्या और निवारण के संदर्भ में आदिवासियों के परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहें हैं।

गोरखमुंडी के बीजों (सूखे फ़ूल) को पीसकर चूर्ण तैयार कर सेवन कराने से आंतों के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

बच्चों को यदि पेट में कृमि (कीड़े) की शिकायत हो तो लहसून की कच्ची कलियों का 20-30 बूँद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

आदिवासियों के अनुसार सूरनकंद की सब्जी अक्सर खाने वाले लोगों को पेट में कृमि की शिकायत नहीं रहती है। कच्चे सूरनकंद को छीलकर नमक के पानी में धोया जाए और लगभग 4 ग्राम कंद को सोने से पहले एक सप्ताह प्रतिदिन चबाया जाए तो पेट के कृमि बाहर निकल आते हैं।

पातालकोट के आदिवासी कच्चे सीताफल को फोड़कर सुखा लेते हैं और इसका चूर्ण तैयार करते है। इस चूर्ण को बेसन के साथ मिलाकर बच्चों को खिलाते है, जिससे पेट के कीड़े मर जाते है।

बेल के पके फलों के गूदे का रस या जूस तैयार करके पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। डाँग- गुजरात के आदिवासी मानते हैं कि बेल के फलों के बजाए पत्तों का रस का सेवन किया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं

पपीता के कच्चे फलों से निकलने वाले दूध को बच्चों को देने से पेट के कीड़े मर जाते है और बाहर निकल आते है। प्रतिदिन रात को आधा चम्मच रस का सेवन तीन दिनों तक कराया जाए तो पेट के कृमि मर जाते हैं।

पातालकोट के हर्बल जानकारों की मानी जाए तो पेट में कीड़े होने पर 1 चम्मच हल्दी चूर्ण रोज सुबह खाली पेट एक सप्ताह तक ताजे पानी के साथ लेने से कीड़े खत्म हो सकते हैं।

जीरा के कच्चे बीजों को दिन में 5 से 6 बार करीब 3 ग्राम की मात्रा चबाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। आदिवासियों के अनुसार कच्चा जीरा पाचक को दुरुस्त भी करता है और गर्म प्रकृति का होने की वजह से कीड़ों को मार देता है और कीड़े शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

कच्चे नारियल को चबाते रहने से पेट के कीड़े मर जाते हैं, डाँग- गुजरात में आदिवासी बच्चों को अक्सर कच्चा नारियल खिलाते हैं और जीरे का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर एक गिलास जीरा पानी का भी सेवन कराते हैं ताकि पेट के कृमि मर जाएं।

परवल और हरे धनिया की पत्तियों की समान मात्रा (20 ग्राम प्रत्येक) लेकर कुचल लिया जाए और एक पाव पानी में रात भर के लिए भिगोकर रख दिया जाए, सुबह इसे छानकर तीन हिस्से कर प्रत्येक हिस्से में थोड़ा सा शहद डालकर दिन में 3 बार रोगी को देने से पेट के कीड़े मर हो जाते हैं।

अमेरिका की GPS प्रणाली का विकल्प होगा नौवहन उपग्रह / America's GPS satellite navigation system will have the option

अमेरिका की GPS प्रणाली का विकल्प होगा नौवहन उपग्रह / America's GPS satellite navigation system will have the option
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अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया दौर शुरू करते हुए भारत ने पीएसएलवी के जरिये नौवहन को समर्पित अपना पहला उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है, जो देश को अमेरिका की जीपीएस प्रणाली का एक विकल्प मुहैया कराएगा।
    
इस उपलब्धि के साथ ही भारत चुनिंदा देशों में शामिल हो गया। बीती रात ठीक 11 बजकर 41 मिनट पर कुल 44 मीटर लंबे पीएसएलवी-सी22 ने यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आईआरएनएसएस-1ए उपग्रह के साथ उड़ान भरी और आसमान के स्याह कैनवस पर गहरे सुनहरे रंग की ज्वाला का चित्र सा बन गया।
    
प्रक्षेपण के करीब 20 मिनट बाद यानी आधी रात से कुछ समय पश्चात रॉकेट ने आईआरएनएसएस-1ए को उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया। तकनीकी तौर पर मंगलवार को कक्षा में स्थापित हुआ आईआरएनएसएस-1ए उन सात उपग्रहों की श्रृंखला में से पहला उपग्रह है, जिन्हें भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (इंडियन रीजनल नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम-आईआरएनएसएस) के लिए छोड़ा जाना है।


आईआरएनएसएस स्पेस सेगमेंट का उद्देश्य देश तथा देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के हिस्से में इसके उपयोगकर्ता को सटीक स्थिति की सूचना देना है। यह इसका प्राथमिक सेवा क्षेत्र है। 
    
आईआरएनएसएस-1ए के सफल प्रक्षेपण से उत्साहित इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने बताया कि 1,425 किग्रा वजन वाला यह उपग्रह अपने प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद निर्धारित कक्षा में सटीक तरीके से प्रविष्ट हो गया। यह इस दुर्लभ नौवहन प्रणाली का प्रथम चरण है। उन्होंने बताया कि आईआरएनएसएस-1ए के प्रक्षेपण पर 125 करोड़ रुपये की लागत आई।
    
प्रक्षेपण के बाद राधाकृष्णन ने कहा इससे साबित होता है कि पीएसएलवी एक अत्यंत भरोसेमंद प्रक्षेपक वाहन है और इस उड़ान के साथ हम देश में अंतरिक्ष अनुप्रयोग के एक नये युग में प्रवेश कर रहे हैं, जो उपग्रह नौवहन कार्यक्रम की शुरुआत है।
    
इसरो के वैज्ञानिकों ने अपनी इस सफलता का जश्न मनाया और राधाकृष्णन ने कहा यह घोषणा करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है कि हमारे पीएसएलवी वाहन की यह एक और शानदार उड़ान थी। यह पीएसएलवी की लगातार 23वीं सफल उड़ान तथा पीएसएलवी के उन्नत संस्करण की चौथी सफल उड़ान थी।
    
आईआरएनएसएस अमेरिका के ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस), रूस के ग्लोबल ऑर्बिटिंग नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएलओएनएएसएस), यूरोपियन यूनियन्स गैलीलियो (जीएनएसएस), चीन के बेइदोउ सैटेलाइट नैविगेशन सिस्टम और जापान के कासी-जेनिथ सैटेलाइट सिस्टम जैसा ही होगा।
    
नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस के अनुप्रयोगों में नक्शा तैयार करना, जियोडेटिक आंकड़े जुटाना, समय का बिल्कुल सही पता लगाना, चालकों के लिए दृश्य और ध्वनि के जरिये नौवहन की जानकारी, मोबाइल फोनों के साथ एकीकरण, भूभागीय हवाई तथा समुद्री नौवहन तथा यात्रियों तथा लंबी यात्रा करने वालों को भूभागीय नौवहन की जानकारी देना आदि शामिल हैं।
    
आईआरएनएसएस के सात उपग्रहों की यह श्रंखला स्पेस सेगमेंट और ग्राउंड सेगमेंट दोनों के लिए है। आईआरएनएसएस के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) के लिए और चार उपग्रह भूस्थैतिक कक्षा (जियोसिन्क्रोनस ऑर्बिट) के लिए हैं। यह श्रृंखला वर्ष 2015 से पहले पूरी होनी है।
    
आईआरएनएसएस के इस मिशन की मियाद 10 साल की है। इस श्रृंखला का अगला उपग्रह आईआरएनएसएस 1बी वर्ष 2014 के शुरू में प्रक्षेपित किया जाएगा। समझा जाता है कि सातों उपग्रह वर्ष 2015 तक कक्षा में स्थापित कर दिए जाएंगे और तब आईआरएनएसएस प्रणाली शुरू हो जाएगी।
    
राधाकृष्णन ने बताया कि 300 करोड़ रुपये ग्राउंड सेगमेंट के लिए अलग रखे गए हैं। लगभग हर उपग्रह पर 125 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह उपग्रह उप भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा (सब-जियोसिन्क्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट) में 284 किमी दूर प्रक्षेपित किया गया, जो पृथ्वी का सबसे निकटतम स्थान है। इसका उच्चतम लक्ष्य 20,650 किमी (पृथ्वी का सबसे दूरस्थ स्थान) के आसपास रखा गया था और इसने उसे 20,625 किमी तक लक्ष्य प्राप्त कर लिया।
    
देर रात को यह इसरो का अब तक का पहला प्रक्षेपण था। इस बारे में संस्थान के एक अधिकारी ने बताया कक्षा के मानकों के आधार पर प्रक्षेपण का समय तय किया गया। आईआरएनएसएस-1ए के लिए आधी रात को प्रक्षेपण की जरूरत थी।
    
पूर्व में पीएसएलवी-सी22 के दूसरे चरण में इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक कंट्रोल एक्चुएटर्स में से एक में खराबी आने की वजह से इसरो ने 12 जून को नियत आईआरएनएसएस-1ए का प्रक्षेपण एक पखवाड़े के लिए टाल दिया था। खामी दूर करने के बाद प्रक्षेपण की नयी तारीख एक जुलाई तय की गई थी

Friday, 28 June 2013

टमाटर के फायदे ...// The advantages of tomato ...

टमाटर खाना हो सकता है बेहद फायदेमंद ये है इसे खाने के 5 बड़े कारण---
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टमाटर सिर्फ स्वाद में ही खट्टा-मीठा नहीं होता बल्कि टमाटर कई तरह के औषधिय गुणों से भी भरपूर होता है। टमाटर एंटी-ऑक्सीडेंट और खासकर लाइकोपीन से भरपूर होता है। लाइकोपीन ही टमाटर को लाल रंग देता है। यह प्रोस्टेट कैंसर तथा हृदयाघात की सम्भावना को भी कम करता है।टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि तत्व विद्यमान होते हैं। यह सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है इसके अलावा भी टमाटर खाने से कई लाभ होते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर टमाटर हर मौसम में फायदेमंद है। आप चाहे इसे सब्जी में डालें या सलाद के रूप में या किसी और रूप में, यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। आइए, जानें टमाटर के फायदे .....

भोजन करने से पहले दो या तीन पके टमाटरों को काटकर उसमें पिसी हुई कालीमिर्च, सेंधा नमक एवं हरा धनिया मिलाकर खाएं। इससे चेहरे पर लाली आती है व पौरूष शक्ति बढ़ती है। पेट में कीड़े होने पर सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई कालीमिर्च लगाकर खाने से लाभ होता है।डाइबिटीज व दिल के रोगों में भी टमाटर बहुत उपयोगी होता है। प्रात: बिना कुल्ला किए पका टमाटर खाना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है। टमाटर खाने वालों को कैन्सर रोग नहीं होता।

दमा रोगियों को चाहिए कि वे पूरे वर्ष टमाटर उपलब्ध रखें। इसके नियमित सेवन से श्वासनली शोथ कम होता है। प्राकृतिक चिकित्सकों का कहना है कि टमाटर खाने से अतिसंकुचन भी दूर होता है और खाँसी तथा बलगम से भी राहत मिलती है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है।टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।

टमाटर के गूदे में दूध व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर चमक आती है। टमाटर झुर्रियों को कम करता है और रोम छिद्रों को बड़ा करता है। इसके लिए टमाटर और शहद के मिश्रण वाला फेस पैक इस्तेमाल करें। टमाटर के छिलके और बीज को निकाल दें। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है।

टमाटर में विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता है, यह आँखों के लिए बहुत लाभकारी है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है। इसके लगातार सेवन से जिगर बेहतर ढंग से काम करता है और गैस की शिकायत भी दूर होती है।जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।